तो विक्रादित्य ने कहा, "मैं अकेला था, लेकिन हारा नहीं था। मेरे साथ मेरे मृत साथियों की यादें थीं, और उन्हें न्याय दिलाने का संकल्प था। जब आपके पास लड़ने का कारण हो, तो अकेलापन कमजोरी नहीं, ताकत बन जाता है।" जीवन में सबसे बड़ी लड़ाई कभी दुश्मन से नहीं, बल्कि अपने मन के डर और अकेलेपन से होती है। जिसमें वह जज़्बा होता है, वह अकेले ही पूरी सेना बन जाता है।
यहाँ "लोन सर्वाइवर" (अकेला बचा हुआ) की भावना पर आधारित एक मौलिक हिंदी कहानी प्रस्तुत है: साल 2045 था। उत्तर भारत के घने जंगलों में एक भयानक गृह युद्ध छिड़ा हुआ था। दो ताकतवर गुटों के बीच संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया था। lone survivor in hindi
आठवें दिन, एक दुश्मन गश्ती दल ने उसे ढूंढ निकाला। चार सशत्र सैनिक उसके सामने थे। हालत खराब थी, लेकिन विक्रादित्य ने आखिरी दम तक लड़ने की ठान ली। उसने अपने पास बचे आखिरी ग्रेनेड और पिस्तौल का उपयोग करके तीन को ढेर कर दिया। चौथे ने उसकी पीठ पर गोली चला दी। तो विक्रादित्य ने कहा
सुबह हुई तो वह अकेला था। बिल्कुल अकेला। चारों तरफ खून से लथपथ ज़मीन, टूटे हुए हथियार और उसके दोस्तों के शव। "मैं अकेला था